नई दिल्ली: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान एक ऐसा सवाल उठा, जिसने केवल इस केस को ही नहीं बल्कि सरकारी दस्तावेजों के अनुवाद की विश्वसनीयता पर भी गंभीर चर्चा छेड़ दी। अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए वीडियो ट्रांसक्रिप्ट के अनुवाद पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि आज जब Artificial Intelligence (AI) जैसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध है, तब किसी भी व्यक्ति के भाषण या बयान का अनुवाद लगभग पूरी तरह सटीक होना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि AI के इस दौर में अनुवाद कम-से-कम 98 प्रतिशत तक सही होना चाहिए, क्योंकि अनुवाद की छोटी-सी गलती भी किसी व्यक्ति के बयान का अर्थ बदल सकती है और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी के शब्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है, तो इससे न केवल उस व्यक्ति की छवि प्रभावित होती है बल्कि अदालत के सामने रखे गए तथ्यों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो जाते हैं।
यह मामला सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उनकी रिहाई की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान जब सरकार की ओर से वांगचुक के भाषण का ट्रांसक्रिप्ट अदालत के सामने रखा गया, तब सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पाया कि उसमें कई ऐसे शब्द और कथन शामिल हैं जिन्हें वांगचुक ने कभी कहा ही नहीं था। इस पर जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी. बी. वराले की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज से मूल वीडियो और उसका सही ट्रांसक्रिप्ट प्रस्तुत करने को कहा। अदालत ने साफ किया कि किसी भी मामले में केवल अनुवादित दस्तावेज़ पर निर्भर नहीं रहा जा सकता, विशेषकर तब जब उसके सही होने पर ही सवाल उठ रहे हों।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी केवल इस एक मामले तक सीमित नहीं मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भविष्य में सभी जांच एजेंसियों और सरकारी संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि किसी भी व्यक्ति के बयान, भाषण या वीडियो का अनुवाद अत्यंत सावधानी और सटीकता के साथ किया जाए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि आधुनिक AI टूल्स का उपयोग केवल सुविधा के लिए नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए भी किया जाना चाहिए। अब इस मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार को वांगचुक के भाषण का मूल और प्रमाणिक ट्रांसक्रिप्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।