सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सलवार का नाड़ा खोलना सीधे तौर पर रेप का प्रयास
नई दिल्ली : यौन अपराधों के मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता और कानूनी व्याख्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय सुनाया है, जिसने न केवल न्यायिक दृष्टिकोण को स्पष्ट किया है बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए एक सशक्त नजीर भी स्थापित कर दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मार्च 2025 के उस विवादित फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी के कृत्य को केवल महिला की लज्जा भंग करने या छेड़छाड़ की श्रेणी में रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत नीयत से किसी महिला को पकड़ता है और उसकी सलवार का नाड़ा खोलने की कोशिश करता है, तो यह केवल छेड़छाड़ नहीं बल्कि स्पष्ट रूप से रेप का प्रयास (Attempt to Rape) माना जाएगा।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे गंभीर कृत्य को हल्के अपराध की श्रेणी में डालना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि यौन अपराधों के मामलों में अदालतों को संवेदनशीलता, सामाजिक प्रभाव और पीड़िता की गरिमा को सर्वोपरि रखना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून की व्याख्या इस प्रकार होनी चाहिए जिससे पीड़िता को न्याय मिले और समाज में यह स्पष्ट संदेश जाए कि महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की आपराधिक मंशा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह फैसला भविष्य में निचली अदालतों और उच्च न्यायालयों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय यौन अपराधों की सुनवाई में सख्ती और स्पष्टता लाएगा तथा ऐसे मामलों में आरोपियों को हल्की सजा मिलने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाएगा। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को महिला सुरक्षा और न्यायिक जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।