झारखण्ड पात्रता परीक्षा पर लटका सवाल : युवाओं का भविष्य अंधेरे में, सरकार पर उठ रहे गंभीर प्रश्

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झारखंड पात्रता परीक्षा पर लटका सवाल : युवाओं का भविष्य अंधेरे में, सरकार पर उठ रहे गंभीर प्रश्न

रांची : झारखंड में लाखों युवाओं का सपना शिक्षक बनने का है, लेकिन सरकार की उदासीनता और लापरवाही ने इन सपनों को अधर में लटका दिया है। झारखंड पात्रता परीक्षा (JTET) को लेकर सालों से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। राज्य के गठन को अब 25 साल पूरे होने को हैं, लेकिन इतने लंबे समय में महज दो बार ही यह परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित हो पाई है। JTET को लेकर राज्यभर में बेरोजगार युवाओं का आक्रोश दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। जगह-जगह छात्र संगठनों और परीक्षार्थियों ने विरोध-प्रदर्शन किए हैं, लेकिन सरकार की तरफ से अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। कई बार धरना-प्रदर्शन, पैदल मार्च और ज्ञापन सौंपे गए। JTET की अनिश्चितता ने न केवल युवाओं का करियर अधर में डाल दिया है, बल्कि उनके परिवार भी मानसिक और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। गोड्डा जिले के अभ्यर्थी राहुल कुमार कहते हैं, “हमने सपना देखा था कि JTET पास करके शिक्षक बनेंगे और परिवार की हालत सुधारेंगे। लेकिन सरकार की लापरवाही से सालों की मेहनत बेकार जा रही है।”

रांची : शिक्षा जगत और सामाजिक क्षेत्र से भी कड़ी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। रांची विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. अजय मिश्रा का कहना है, “JTET की नियमितता न होना सरकार की नीतिगत विफलता है। यह न केवल युवाओं का बल्कि पूरे समाज का नुकसान है।”

रांची : JTET परीक्षा अब केवल रोजगार का सवाल नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति का मुद्दा बन चुका है। 2024 के विधानसभा चुनाव में लगभग सभी राजनीतिक दलों ने शिक्षकों की बहाली और JTET परीक्षा को समय पर कराने का वादा किया। लेकिन चुनाव खत्म होते ही यह मुद्दा हाशिये पर चला गया। रांची : झारखंड में बेरोजगारी पहले से ही गंभीर समस्या बनी हुई है। JTET जैसी अहम परीक्षा का न होना युवाओं को और गहरे संकट में धकेल रहा है। अभ्यर्थियों के परिवारों का कहना है कि वे बच्चों की पढ़ाई और कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च कर चुके हैं। रांची : JTET की अनिश्चितता से नाराज़ युवाओं ने अब आंदोलन तेज करने का मन बना लिया है। छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों ने राज्यव्यापी आंदोलन का खाका तैयार किया। उनका पहला कदम सोशल मीडिया पर #JTET_कराओ और #SaveJharkhandYouth अभियान चलाना है। रांची : विशेषज्ञों और छात्र संगठनों का कहना है कि अगर सरकार समय रहते ठोस कदम उठाए, तो संकट का समाधान संभव है।

  1. स्थायी कैलेंडर बनाना : हर साल JTET परीक्षा के लिए निश्चित तिथि घोषित करनी चाहिए।
  2. फीस रिफंड या छूट : 2024 में लिए गए फॉर्म फीस का निपटारा करना आवश्यक है।
  3. ऑनलाइन और ऑफलाइन तैयारी संसाधन : छात्रों को ऑनलाइन और ऑफलाइन कोचिंग तथा तैयारी सामग्री उपलब्ध कराना।
  4. शहर और ग्रामीण असमानता कम करना : ग्रामीण छात्रों के लिए विशेष तैयारी केंद्र और मार्गदर्शन कार्यक्रम।

युवाओं का कहना है कि अगर सरकार जल्द परीक्षा कराए और वादों को निभाए, तो झारखंड के करोड़ों युवा अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। रांची : JTET मुद्दा अब केवल शिक्षा का सवाल नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक दबाव का भी विषय बन गया है। छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे आंदोलन को शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से आगे बढ़ाएंगे।

  1. सोशल मीडिया कैम्पेन : #JTET_कराओ, #SaveJharkhandYouth जैसे अभियान चलाना।
  2. राजधानी में शांतिपूर्ण धरना : रांची में मुख्य सड़कों और सरकारी कार्यालयों के सामने प्रदर्शन।
  3. जिला स्तर पर आंदोलन : गोड्डा, धनबाद, जमशेदपुर और अन्य जिलों में समानांतर प्रदर्शन।
  4. विधायी दबाव : स्थानीय नेताओं और विपक्ष के साथ मिलकर विधानसभा में मुद्दा उठाना।
  5. कानूनी कार्रवाई : सामूहिक याचिका और अदालत के माध्यम से न्यायिक हस्तक्षेप की तैयारी।

MD ASIF EQUBAL

Md Asif Equbal एक समर्पित संवाददाता और पत्रकार हैं, जो समाज, शिक्षा और स्थानीय खबरों को सरल और सटीक तरीके से पाठकों तक पहुँचाते हैं। वे तथ्यपरक और निष्पक्ष रिपोर्टिंग में विश्वास रखते हैं और हर खबर को समय पर प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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