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बसंतराय की धड़कन डॉक्टर जहीर अहमद: अंतिम सफर में उमड़ी भावनाओं की बाढ़

डॉ. जहीर अहमद का निधन: बसंतराय की धड़कन बंद, अंतिम यात्रा में हज़ारों शोकाकुल | अवतार न्यूज़

डॉ. जहीर अहमद का निधन: बसंतराय की धड़कन बंद, अंतिम यात्रा में हज़ारों शोकाकुल

✍️ अवतार न्यूज़ संवाददाता 📍 बसंतराय, गोड्डा, झारखंड ⏱️ पढ़ने का समय: 4 मिनट
डॉ जहीर अहमद - बसंतराय के प्रिय नेता की अंतिम यात्रा
बसंतराय के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष डॉ. जहीर अहमद की अंतिम यात्रा में हज़ारों लोग शामिल हुए

बसंतराय के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष और समाजसेवी डॉ. जहीरुद्दीन (जहीर अहमद) के निधन की खबर से आज पूरा प्रखंड शोक में डूब गया। अंतिम दर्शन के लिए भारी संख्या में लोग जुटे हुए हैं और कुछ ही देर में उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

ताज़ा अपडेट: डॉ. जहीर अहमद का अंतिम संस्कार स्थानीय कब्रिस्तान में दोपहर 3:30 बजे किया जाएगा। हज़ारों की संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं।

बसंतराय की धड़कन बंद, हज़ारों शोकाकुल

भीड़ अंतिम दर्शन के लिए जुटी हुई — बसंतराय
भीड़ अंतिम दर्शन के लिए जुटी हुई — बसंतराय
ईदगाह में नमाज़ और प्रार्थना के पल
ईदगाह में नमाज़ और प्रार्थना के पल

डॉ. जहीर अहमद केवल एक राजनीतिक चेहरे नहीं थे; वह समाज के हर तबके में चिर-परिचित और सम्मानित थे। उनके व्यक्तित्व की खासियत उनकी सादगी और लोगों से जुड़ने की सरलता थी।

"कुछ लोग चले नहीं जाते — वे लोगों की यादों में और क्षेत्र की धड़कनों में बस जाते हैं। डॉ. जहीर साहब ऐसे ही शख्स थे जिन्होंने अपनी सादगी और सेवाभाव से सभी का दिल जीत लिया था।"

लंबे समय तक प्रखंड अध्यक्ष रहे डॉ. जहीर ने राजनीति को पद का साधन नहीं बल्कि सेवा का माध्यम माना। उनका शांत, मृदुभाषी और संतुलित स्वभाव उन्हें क्षेत्र में अलग पहचान देता था।

डॉ. जहीर अहमद का जीवन और योगदान

डॉ. जहीर कई वर्षों तक बसंतराय ईदगाह के सेक्रेटरी रहे। इस भूमिका में उन्होंने समुदाय के हर वर्ग की सेवा को सर्वोपरि रखा। साथ ही, उनका खेल प्रेम — विशेषकर फुटबॉल कमेंट्री में उनका परिचय — उन्हें युवा और बुजुर्गों दोनों के बीच प्रिय बनाता था।

उनकी धर्मपत्नी एक बार पंचायत समिति की सदस्य रह चुकी हैं। उनके दो पुत्र और दो पुत्रियाँ आज विभिन्न कार्यक्षेत्रों में सम्मानित स्थान रखते हैं। डॉ. जहीर ने शिक्षा, संस्कार और सेवा के मूल्य अपनी अगली पीढ़ी को दिए।

अंतिम यात्रा का कार्यक्रम

सुबह 10:00
रिम्स रांची से शव बसंतराय पहुँचा
दोपहर 12:00
ईदगाह में नमाज-ए-जनाजा
दोपहर 1:30
आम जनता के लिए अंतिम दर्शन
दोपहर 3:30
स्थानीय कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार

एक विरासत का अंत

डॉ. जहीर का निधन बसंतराय के लिए एक बड़ा आघात है। उनके जाने का अर्थ केवल वियोग नहीं, बल्कि एक विरासत का निर्माण भी है। उनकी सेवाभावना और सादगी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

अवतार न्यूज़ संवाददाता

अवतार न्यूज़ रिपोर्टिंग टीम

अवतार न्यूज़ की टीम ने बसंतराय से सीधी रिपोर्टिंग की है। हमारी टीम स्थानीय खबरों और घटनाओं की विस्तृत कवरेज प्रदान करती है।

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